The Story of villagers boy ( part-2)
गांव का जीवन भले ही असुविधाओं से परिपूर्ण रहता है पर उसके असुविधाओं के चादर में गांव का जीवन अत्यन्त सुखमय होता है। भारत जैसे विकासशील देश में जहां शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है उसका प्रभाव गांव पर पड़ता साफ दिखाई दे रहा है। आज हम गांव के बच्चों के जीवन के ऊपर शहरों के पड़ने वाले प्रभावों को चर्चा करेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ने से गांव के बच्चों के जीवन पर अधिक प्रभाविता देखने को मिली है
प्राचीनतम समय से ग्रामीण लोग कृषि कार्यों में सलग्न रहते हैं तथा खुद छोटे मोटे व्यवसाय करते थे।जैसे दूध बेचना, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, चमड़ा उद्योग परन्तु आज के समय में जहां आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है। जिसके चलते गांवों के बच्चों में कुछ नवीन बदलाव समय समय पर दिखाई दे रहे हैं। जैसे
गांव से पलायन
गांव में दो प्रकार के बच्चे होते है
एक जो पढ़ने के लिए गांवों से पलायन करते है तथा एक तो वो जो आय के लिए पलायन करते है
और उनके साथ सिर्फ ज्ञान और अर्थ ही नहीं बल्कि शहरों की संस्कृति भी आती है
जैसे गांव के बच्चों को आगे पढ़ने की जागरुकता मिलना तथा तरह तरह के शहरी वस्त्रों को पहनना
ग्रामीण संस्कृति पर प्रभाव
आज भी भारत की संस्कृति को संजोए रखने में गांव सबसे अधिक महत्वपूर्ण है यही गांव के व्यक्ति जब शहरों में जाते हैं
तो भले ही वह ग्रामीण संस्कृति से दूर हो गए हो परन्तु पुरी तरह से भूले नहीं होते है जिसका सबसे अच्छा उदाहरण हमे छठ पूजा पर दिखता है
उपभोक्तावादी सोच का पनपना
परंतु आज के समय में जहां आधुनिकता शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा वह गांव के बच्चों को अनेक उपभोक्तावादी सोच से घेर ले रहा है
बच्चा आधुनिक फिल्में देख के सोचता है कि हम भी ऐसे ही करेंगे पर उसके ऐसे ही करने के चक्कर में उसके जीवन में कुछ समस्याएं हो जाती है
जैसे शहरों की तरह वह बड़ी बड़ी गाड़ियां लेना चाहता है
पैसा कमाना चाहता है जो उसे एक उपभोक्तावादी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है
नशीली वस्तुओं का उपयोग
गरीब शहरी बच्चे अकसर नशे के लत का शिकार हो जाते है जो एक ग्रामीण बच्चा देखते ही उसे अनुभव कर आनंदित करने का प्रयत्न करने लगता है जैसे
सिगरेट, पान मसाला का गांवों के बच्चों में बढ़ता प्रचलन
पहनावे तथा वेशभूषा में परिवर्तन
वर्तमान समय में ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे के पहनावे में शहरीकरण साफ दिखाई देता हैं
जैसे डैमेज पैंट, टीशर्ट जो आपने प्राचीनतम ढोती कुर्ता को अब भूल ही गए है तथा उसे पहनने वाले को अनपढ़ समझते हैं






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