Saturday, March 1, 2025

The Story of villagers boy part-3

प्यार, इश्क, मोहब्बत ये सभी फ़िल्मों तथा शहरों में जितने आसान व अधिक स्वतंत्रता युक्त नजर आते हैं वह गांव में आते आते उतने ही समस्याओं की जाल में फंस जाते हैं। आज हम शहरों के बिल्कुल विपरीत गांव के बच्चों इश्क की बात करेंगे।

गांव के जनजीवन में जहां आज भी प्यार जैसे शब्दों को लोग एक तुक्छ नजर से देखते हैं इसके बीच जहां शहरों के बच्चे खुल कर अपने अभिभावकों के समक्ष अपने प्यार का खुलासा कर देते वही शहरों के बच्चे इसे करने में असमर्थ होते हैं।
उन्हें समाज, तथा पारिवारिक समस्याओं के तले दब जाने से न तो वह उस चीज खुल आनन्द ले पाते हैं और न ही खुल के बता पाते हैं 
और ये कार्य उनके जनजीवन के साथ साथ परिवार के लिए भी जहरीला साबित होता है। उसी पर कहा गया है 

ये मुहल्ले की मोहब्बत भी कितनी अजीब है दो घर की दूरी है पर बीच में सारा जमाना है 

पर समस्या दिन पर दिन ऐसा होता जा रहा है कि शहरों के आधुनिक संस्कृति जैसे ही गांव में पहुंचती है वह बिखर जाती है गांव में शहरों की तरह आजादी नहीं है जैसे शहरों में लिव इन रिलेशनशिप जैसी युक्तियों का गांव में आने कुछ परिवर्तन के साथ लिया गया जो गांव के समाज ने इसे बिल्कुल ही खराब व तुक्छ समझा 

वैवाहिक मतभेद 

शहरों में जहां आधुनिकता आपने चरम पर है तथा विवाह में बच्चे को मनमर्जी के द्वारा निर्णय लिया जाता है वहीं गांव में यह अभी भी पूरी तरह से कार्य में नहीं है 

Love मैरेज ❤️

गांव में लव मैरेज को पूरा समाज,परिवार खराब समझता है।
परन्तु लव मैरेज का असली मतलब क्या होता है यही ना कि बच्चे स्वयं के मन से विवाह करे। जो समाज पूरी तरह नकार देता है जिससे लड़के और लड़की के भागने की घटनाएं अधिक देखने को मिलती है 

सामाजिक तुक्छता 

समाज में लोग में इस बात से ज्यादा अशक्त होते है कि ये बच्चा किस लड़की से बात कर रहा है। गांव में अगर आप किसी भी लड़की से 2,3 दिन वैसे ही बात कर ले तो पूरे गांव में ये माहौल फैल जाता है जिससे समाज की नजर में वह बच्चा अब उस लिस्ट में आ गया 
अगर कोई बच्चा किसी से बात नही करता तो उसका गांव में अधिक प्रभाव होता है 


आगे हम गांव के आध्यात्मिक प्रेम के सकारत्मक पक्ष की चर्चा करेंगे 


0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home