अधूरी ख्वाहिशें.💖[ (मिट्टी से उड़ान.💖)]
ख्वाहिशें एक व्यक्तिगत जीवन की वो आवश्यक उपकरणों में से है जो व्यक्ति को जीवन जीने के लिए मजबूर कर देती है। जीवन प्रत्यास्था में बिना ख्वाहिश के रहना एक जानवर के समान है इसी परिप्रेक्ष्य में हम आज एक बच्चे के जन जीवन में खुद की खुशियों से चल रही लड़ाई की चर्चा करेंगे।
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श्रीधर कुमार नाम का एक बच्चा जो ग्रामीण पृष्ठभूमि में पैदा हुआ। तथा एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से तालुक रखने के नाते स्वाभाविक है कि वह संयुक्त पारिवारिक जन जीवन से जुड़े अंतर्संबंधों से परस्पर आसक्त था।
श्रीधर परिवार के परिवार में उसका एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन थी वह घर में सबसे छोटा होने के नाते उसे घर में सबसे ज्यादा लाड प्यार प्राप्त हुआ करता था।
उसके पिता पेसे से किसान थे। जो आपनी और घर की देख भाल उसी से किया करते थे
एक ग्रामीण पृष्ठभूमि तथा संयुक्त पारिवारिक जन जीवन और किसानी परिस्थितियों के होने के नाते उसके घर में अमूमन धन की कमी होती थी पर इन सभी स्थितियों के बावजूद उसके पिता श्री रमन कुमार जी ने अपने बड़े पुत्र और पुत्री की शिक्षा में कोई कमी नहीं होने दी
समय के साथ श्री रमन कुमार जी की आयु बढ़ने के साथ साथ काम करने में सक्षमता की कमी होने लगी।
और अब छोटे बेटे की शिक्षा पर कोई असर न पहुंचे इसलिए भाई श्री बेनी कुमार उसकी शिक्षा का दायित्व संभाला
अभी श्रीधर 12वी कक्षा में सफल हुआ ही था।
❤️❤️❤️
कहानी के द्वितीय चरण को आगे भाग में दिखाएंगे। आप अपनी दिव्य दृष्टि मेरे कहानियों पर बनाए रखे...............🙏
आपका मेरी कहानी पढ़ने के लिए ध्यानवाद......❤️🙏👍


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