Friday, April 18, 2025

मिट्टी से उड़ान.💖

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श्रीधर की इंटरमीडिएट की परीक्षा से उत्तीर्ण होने के पूर्व से ही उसे वैज्ञानिक विषयों मे अधिक रुचि थी। जो आपने संगत के बच्चों के विचारों के समुच्चय से बना विचार था। और ऐसा अमूमन देखा जाता है कि आपके कक्षा के साथी जिस प्रकार की रुचि रखते हैं भविष्य में वे जो करना करना चाहते है वो आपके विचारों में भी घुल जाता है।
श्रीधर की प्रारंभिक शिक्षा भले ही गांव के नजदीकी संस्थानों में हुए हो परन्तु वह शहरी जन जीवन से बिल्कुल कटा हुआ नहीं था।
उत्तीर्ण होने के पश्चात् श्री बेनी कुमार ने उसकी शिक्षा में शुरुआती सहारा देना प्रारंभ किया।
पर वैज्ञानिक विषयों मे चल रही अधिक पूंजी लगात ने उसे मानविकी विषय पढ़ने पर मजबूर कर दिया।
बड़े भाई ने उसका दाखिला शहर के एक स्नातक विद्यालय में करवा दिया।
पर पढ़ाई में श्रीधर ठीक था उसे जितना वैज्ञानिक विषयों में रुचि थी उतनी ही मंद मंद मानविकी विषयों में भी हो गई 
स्नातक विद्यालय की छूट इंटरमीडिएट से बिल्कुल भिन्न होती है जहां लड़के आस पास के वातावरण इतने तेजी से परिवर्तित हो जाते हैं। वे खुद को बड़ा समझने लगते हैं, आगे समझने लगते हैं, इस परिवर्तनकारी समय में लड़के खुद किसी के प्रति आकर्षित होने से भी नहीं रोक पाते। जो उनके उम्र के मुताबित उनके चाल, ढाल, पहनावे, बोली भाषा, में परिवर्तन से साफ  दिखता है।


श्रीधर एक ग्रामीण लड़का था जो स्नातक की संक्रमणीय दुनिया में खोने के लिए बहुत नादान था। वह रोज अध्ययन करने विद्यालय आता। उसके मित्र भी कुछ ही दिनों के पश्चात् बन गए। वैसे देखा जाए तो आप जैसे होंगे आपको वैसे ही मित्र प्राप्त होते है जो अंग्रेजी के शब्द वाइब की तरह है जिससे मिलता है उसी से दोस्ती पक्की हो जाती है 
स्वाभाविक था शांत स्वभाव से ग्रसित श्रीधर के मित्र उसी की तरह थे पर जो समय समय आपने मंतव्य की झलक पेश किया करते थे।




                                 ❤️❤️❤️




तीसरा चरण जल्दी ही आपके लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।
मेरी कहानी अगर आपके जीवन के जुड़ रही है तो कृपया इसे आपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर करे।

कहानी को ध्यान से पढ़ने के लिए धन्यवाद.......🙏


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