Friday, February 28, 2025

The Story of villagers boy ( part-2)

 गांव का जीवन भले ही असुविधाओं से परिपूर्ण रहता है पर उसके असुविधाओं के चादर में गांव का जीवन अत्यन्त सुखमय होता है। भारत जैसे विकासशील देश में जहां शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है उसका प्रभाव गांव पर पड़ता साफ दिखाई दे रहा है। आज हम गांव के बच्चों के जीवन के ऊपर शहरों के पड़ने वाले प्रभावों को चर्चा करेंगे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ने से गांव के बच्चों के जीवन पर अधिक प्रभाविता देखने को मिली है 

प्राचीनतम समय से ग्रामीण लोग कृषि कार्यों में सलग्न रहते हैं तथा खुद छोटे मोटे व्यवसाय करते थे।जैसे दूध बेचना, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, चमड़ा उद्योग परन्तु आज के समय में जहां आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है। जिसके चलते गांवों के बच्चों में कुछ नवीन बदलाव समय समय पर दिखाई दे रहे हैं। जैसे 

गांव से पलायन


गांव में दो प्रकार के बच्चे होते है
एक जो पढ़ने के लिए गांवों से पलायन करते है तथा एक तो वो जो आय के लिए पलायन करते है
और उनके साथ सिर्फ ज्ञान और अर्थ ही नहीं बल्कि शहरों की संस्कृति भी आती है 
जैसे गांव के बच्चों को आगे पढ़ने की जागरुकता मिलना तथा तरह तरह के शहरी वस्त्रों को पहनना 

ग्रामीण संस्कृति पर प्रभाव 


आज भी भारत की संस्कृति को संजोए रखने में गांव सबसे अधिक महत्वपूर्ण है यही गांव के व्यक्ति जब शहरों में जाते हैं 
तो भले ही वह ग्रामीण संस्कृति से दूर हो गए हो परन्तु पुरी तरह से भूले नहीं होते है जिसका सबसे अच्छा उदाहरण हमे छठ पूजा पर दिखता है 

उपभोक्तावादी सोच का पनपना


परंतु आज के समय में जहां आधुनिकता शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा वह गांव के बच्चों को अनेक उपभोक्तावादी सोच से घेर ले रहा है 
बच्चा आधुनिक फिल्में देख के सोचता है कि हम भी ऐसे ही करेंगे पर उसके ऐसे ही करने के चक्कर में उसके जीवन में कुछ समस्याएं हो जाती है 
जैसे शहरों की तरह वह बड़ी बड़ी गाड़ियां लेना चाहता है 
पैसा कमाना चाहता है जो उसे एक उपभोक्तावादी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है 

नशीली वस्तुओं का उपयोग 


 गरीब शहरी बच्चे अकसर नशे के लत का शिकार हो जाते है जो एक ग्रामीण बच्चा देखते ही उसे अनुभव कर आनंदित करने का प्रयत्न करने लगता है जैसे 
सिगरेट, पान मसाला का गांवों के बच्चों में बढ़ता प्रचलन 

पहनावे तथा वेशभूषा में परिवर्तन


वर्तमान समय में ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे के पहनावे में शहरीकरण साफ दिखाई देता हैं 
जैसे डैमेज पैंट, टीशर्ट जो आपने प्राचीनतम ढोती कुर्ता को अब भूल ही गए है तथा उसे पहनने वाले को अनपढ़ समझते हैं 
 

ठीक से देखे तो अब उस गांव के जन जीवन में बच्चों के सभी चीजों में शहरीकरण दिखाई देने लगा है आगे हम ग्रामीण बच्चे के अंदर होने वाली कुछ खास चीजों के ऊपर बात करेंगे धन्यवाद 


Thursday, February 27, 2025

The Story of villagers boy

एक ग्रामीण बच्चे का जीवन अखरोट रूपी फल की तरह होता है जो ऊपर से समस्याओं जैसा जो कठोर होता तथा अंदर से एक लाभदायक फल होता है ग्रामीण जीवन कुछ महत्वपूर्ण कारणों से समस्या झेलता है तथा कुछ कारणों से उसे लाभ होता है 

ग्रामीण परिस्थितियों के बीच घिरा बच्चा


इस पृथ्वी पर सभी बच्चों के विचार, पसंद, नापसंद, सब में अंतर होता है 
कुछ बच्चों को जो पसंद होता है उसे उसकी परिस्थिति नहीं मिलने देती 
जैसे एक गरीब बच्चा जो एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से तालुक रखता हो। तथा उसके उसके आस पास के वातावरण भी उसी प्रकार हो जो एक आम शहरी बच्चे से बिल्कुल ही भिन्न है।
जब वह बच्चा आगे जाता है किसी भी प्रोफेशन को फॉलो करता है। उसे वह समस्या एक शहरी बच्चे के मुकाबले अधिक झेलनी पड़ती है।
जैसे कंपटीशन एग्जाम को ही ले ले 
एक शहरी बच्चे को जिसके माता पिता खुद एक अच्छे जॉब में हो 
उन्हें यह इनकी जानकारी आसानी से मिल सकती है 
जैसे अभिभावकों द्वारा, आस पास का माहौल, टीवी न्यूज चैनल 
परंतु इसके बिल्कुल विपरीत एक ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे के ऐसा कुछ नहीं होता है 
जो आगे जाकर उनकी असफलताओं के मंत्रिमंडल में अपनी जगह बना लेते है 

आर्थिक समस्या


एक ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे को सबसे मुख्य समस्या उसका आर्थिक रूप से पिछड़ा होना है 
जो उसको अन्य शहरी बच्चों के मुकाबले पीछे खींचता है 

जागरूकता का अभाव


कई बच्चे जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से होते हैं उन्हें आधारभूत जानकारी नहीं होती है तथा अपने विचारों से पिछड़ों होते हैं 
जैसे एक सवर्ण ग्रामीण बच्चा जो अपने साथ के पिछड़े बच्चों के साथ भेदभाव करने लगता है

शैक्षिक रूप से पीछे


ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे को उन शैक्षिक संस्थाओं तक पहुंच नहीं मिल पाती जो उन्हें शहरी बच्चे से मुकाबला करवा सके 

परंतु इन सभी कारणों के बावजूद के ग्रामीण बच्चे का जीवन सुखमय होता है 

शारीरिक समस्याओं से आसक्त

देखा जाए तो शहरी बच्चों की अपेक्षा ग्रामीण बच्चे अधिक शारीरिक योग्य होते हैं 
गांव का देशी भोजन जो शहरों के फास्ट फूड के मुकाबले अधिक पोषक तत्वों से भरा होता है 

बीमारी की कमी

ग्रामीण लोगों में बीमारी की संभावना शहरी लोगों से कम होती है हालांकि शहरों में होने वाले प्रदूषण उन्हें और भी कमजोर कर देता है 

जीवन प्रत्यास्था

आज भी एक ग्रामीण पृष्ठभूमि के व्यक्ति शहरों के अपेक्षा अभी जीवन व्यतीत करते हैं 

संस्कृति का बचाव




आज भी सांस्कृतिक कार्यों में शहरों के मुकाबले गांव काफी आगे है 

कुल मिलाकर कहे तो गांव का जीवन एक सुकून का जीवन है जो बिना किसी मानसिक समस्याओं के आसानी से व्यतीत किया जा सकता है 

आगे हम ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण कार्यों तथा शहरों से आने वाली समस्यायों के बारे में चर्चा करेंगे 













UPSC CSC 2025 के लिए आवश्यक किताबें

 संघ लोक सेवा आयोग के प्रारंभिक परीक्षा की कठिनाई और बढ़ते बाजारो में मटेरियल के चलते एस्पिरेंट को अपने पुस्तकों को निम्नवत रखना अधिक आवश्यक है 

कुछ आवश्यक किताबें इस प्रकार हैं

इतिहास 

RS sharma (प्राचीन भारत) 

Satish chandra (मध्यकालीन भारत)

Bipin chandra (आधुनिक भारत)

Current affairs (कला एवं संस्कृति)

भूगोल 

6-12 NCERT 

तथा करेंट अफेयर्स के लिए किसी कोचीन की मैगजीन या क्लासेज 

अर्थशास्त्र 

Murnal patel sir के नोट्स 

तथा करेंट अफेयर्स के लिए किसी कोचीन की मैगजीन या क्लासेज 

राजव्यवस्था 

M lakmikant की बुक 

तथा करेंट अफेयर्स के लिए किसी कोचीन की मैगजीन या क्लासेज 

विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी 

दृष्टि क्विक बुक

तथा करेंट अफेयर्स के लिए किसी कोचीन की मैगजीन या क्लासेस 

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी 

शंकर ias के नोट्स 

तथा करेंट अफेयर्स के लिए किसी कोचीन की मैगजीन या क्लासेस 

करेंट अफेयर्स 

Only ias के नोट्स 

Daily एडिटोरियल 

PT 365